भारत की विदेश नीति और रक्षा तैयारी पर बड़ा संदेश
PM मोदी का विदेश नीति और रक्षा तैयारियों पर बड़ा संदेश: ‘भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और वैश्विक सहयोग का समर्थक रहा है, लेकिन देश की संप्रभुता, सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र, संतुलित और राष्ट्रहित आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों, क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा संबंधी नए खतरों का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक जिम्मेदार और प्रभावशाली शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है और वैश्विक मुद्दों पर भारत की राय को गंभीरता से सुना जा रहा है। G20, BRICS, SCO और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी इसका प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति का मूल उद्देश्य सभी देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखना, वैश्विक शांति को बढ़ावा देना और विकास के लिए सहयोग बढ़ाना है। भारत किसी भी देश पर दबाव बनाने की नीति नहीं अपनाता और न ही किसी बाहरी दबाव में अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व शांति और स्थिरता भारत की प्राथमिकता है, लेकिन यदि देश की सुरक्षा को चुनौती मिलती है तो भारत उसका प्रभावी और उचित जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है। रक्षा क्षेत्र पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन को लगातार बढ़ावा दे रही है। स्वदेशी लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणाली, ड्रोन, आधुनिक युद्धपोत, रक्षा उपकरण और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों का केवल आयातक नहीं, बल्कि निर्यातक बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है। साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन तकनीक और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। सरकार इन सभी क्षेत्रों में क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीक के विकास पर लगातार निवेश कर रही है। उन्होंने भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और सम्मान को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। पिछले वर्षों में संकटग्रस्त देशों से भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए चलाए गए विभिन्न अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहता है। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को भारत की विदेश नीति के प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारत आर्थिक विकास, रोजगार और नवाचार को नई गति देना चाहता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलें देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। देशवासियों से अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मजबूत और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से नवाचार, अनुसंधान, तकनीकी विकास और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उनके अनुसार, विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश आर्थिक, तकनीकी और रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह संदेश भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा रणनीति की स्पष्ट दिशा को दर्शाता है। बदलते वैश्विक माहौल में भारत संतुलित कूटनीति, मजबूत रक्षा क्षमता और आर्थिक मजबूती के साथ विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में रक्षा आधुनिकीकरण, रणनीतिक साझेदारी और डिजिटल शक्ति पर सरकार का विशेष फोकस रहने की संभावना है।
